जय बाबा मोहन राम

नीले घोड़े वाले बाबा का धाम, काली खोली

बीमारी से मुक्ति – बाबा की कृपा

लेखक: अर्जुन मित्तल· स्थान: मुरादनगर, उत्तर प्रदेश· तिथि: 27-09-2022 168

कुछ वर्ष पहले मेरी माता जी गंभीर बीमारी से पीड़ित हो गईं। अचानक ही उनका स्वास्थ्य गिरने लगा। पहले तो हल्की-फुल्की थकान और कमजोरी थी, लेकिन धीरे-धीरे स्थिति बिगड़ती चली गई। कई डॉक्टरों को दिखाया, ढेरों दवाइयाँ चलीं, जाँचें हुईं, लेकिन कोई ठोस सुधार नहीं हुआ। परिवार पर मानो अंधेरा छा गया था। हम सबके मन में चिंता और भय घर करने लगा—“क्या अब माँ ठीक हो पाएँगी?” हर रात बेचैनी से गुज़रती, और हर सुबह और अधिक निराशा लेकर आती। इन्हीं कठिन दिनों में एक पड़ोसी ने कहा—“तुम बाबा मोहन राम से मदद माँगो। उन्होंने असंख्य भक्तों की पीड़ा हर ली है, निश्चित ही तुम्हारे घर भी कृपा बरसेगी।” पहले तो मन थोड़ा संकोच में रहा, लेकिन जब आस्था का भाव जागा तो मैंने ठान लिया कि सच्चे मन से बाबा को पुकारना ही उपाय है। अगले ही दिन से हमने घर पर बाबा का जाप शुरू कर दिया—“जय बाबा मोहन राम 🔱🙏।” रोज़ सुबह-शाम आरती गाते, अगरबत्ती जलाते और माता जी के पास बैठकर बाबा से प्रार्थना करते। धीरे-धीरे एक अजीब-सी शांति घर में फैलने लगी। माँ के चेहरे पर जो पीड़ा और चिंता थी, उसकी जगह विश्वास आने लगा। वह भी कहने लगीं—“मुझे लगता है बाबा मेरे पास हैं।” और फिर वही हुआ जिसका हमें इंतज़ार था—माँ की हालत धीरे-धीरे सुधरने लगी। जिन दवाइयों का कोई असर नहीं हो रहा था, वे अब असर दिखाने लगीं। जिन रिपोर्टों में पहले सिर्फ नकारात्मक परिणाम आते थे, उनमें सुधार दिखने लगा। डॉक्टर तक हैरान थे—“ये चमत्कार कैसे हो रहा है?” कुछ ही महीनों में माँ पूरी तरह स्वस्थ हो गईं। जो बीमारी हमें असंभव-सी लग रही थी, वह बाबा की कृपा से मानो हवा में उड़ गई। परिवार में फिर से हँसी-खुशी लौट आई। आज भी जब हम उस दौर को याद करते हैं, तो भावुक हो उठते हैं। यह किसी दवा या डॉक्टर का ही काम नहीं था—यह बाबा मोहन राम का आशीर्वाद था। मेरे इस अनुभव से यही सीख है कि जब हालात हमारे हाथ से बाहर हो जाएँ, तब निराश होने की बजाय आस्था का सहारा लेना चाहिए। बाबा मोहन राम अपने भक्तों की पुकार अवश्य सुनते हैं। चाहे बीमारी हो, संकट हो या कोई और कठिनाई—अगर मन सच्चा है और श्रद्धा अटूट है, तो बाबा चमत्कार अवश्य करते हैं।