जय बाबा मोहन राम

नीले घोड़े वाले बाबा का धाम, काली खोली

बाबा मोहन राम की कृपा – एक सच्चे विश्वास की अद्भुत अनुभूति

लेखक: दीपक शर्मा · स्थान: हरियाणा· तिथि: 25-01-2022 323

जय बाबा मोहन राम की। मेरा नाम दीपक शर्मा है और मैं हरियाणा के एक छोटे से गाँव से हूँ। आज मैं अपने जीवन का वह अनुभव साझा करना चाहता हूँ जिसने मेरी सोच, मेरा विश्वास और मेरा पूरा जीवन बदल दिया। यह सिर्फ एक कहानी नहीं है, बल्कि मेरे जीवन का वह सच है जिसे याद करके आज भी मेरी आँखें नम हो जाती हैं। मैंने हमेशा लोगों से बाबा मोहन राम जी की महिमा सुनी थी, लेकिन जो अनुभव मुझे मिला, उसने मुझे पूरी तरह बाबा जी के चरणों में झुका दिया। यह बात लगभग तीन साल पहले की है। उस समय मेरा जीवन बहुत कठिन दौर से गुजर रहा था। मैं दिल्ली में एक प्राइवेट कंपनी में नौकरी करता था। सैलरी ठीक थी लेकिन जिम्मेदारियाँ बहुत ज्यादा थीं। घर में माता-पिता, पत्नी और दो छोटे बच्चे थे। ऊपर से मेरे पिता की तबीयत भी लगातार खराब रहती थी। डॉक्टरों के चक्कर लगाते-लगाते हम थक चुके थे। हर महीने दवाइयों में इतना खर्च हो जाता था कि घर चलाना मुश्किल हो गया था। धीरे-धीरे मेरी नौकरी पर भी असर पड़ने लगा। तनाव इतना बढ़ गया था कि रात को नींद नहीं आती थी। ऑफिस में छोटी-छोटी गलतियाँ होने लगीं और मेरे मैनेजर ने मुझे कई बार चेतावनी दी। मुझे लगने लगा था कि शायद मेरी नौकरी भी चली जाएगी। उस समय ऐसा महसूस होता था जैसे चारों तरफ अंधेरा ही अंधेरा हो। एक दिन मेरी माँ ने कहा, “बेटा, तू एक बार बाबा मोहन राम जी के दर्शन करके आ। बाबा जी पर विश्वास रख, सब ठीक होगा।” मैंने पहले ज्यादा ध्यान नहीं दिया क्योंकि मैं खुद को बहुत practical इंसान समझता था। लेकिन जब मुश्किलें लगातार बढ़ती गईं तो मैंने तय किया कि एक बार बाबा जी के दरबार जरूर जाऊँगा। शनिवार की सुबह मैं अपने दोस्त के साथ भिवाड़ी के पास बाबा मोहन राम जी के मंदिर गया। रास्ते भर मेरे मन में अजीब सी शांति महसूस हो रही थी। मंदिर के पास पहुँचते ही ऐसा लगा जैसे मन का बोझ धीरे-धीरे हल्का होने लगा हो। मंदिर में बहुत भीड़ थी, लेकिन वहाँ की ऊर्जा अलग ही थी। हर तरफ “जय बाबा मोहन राम” की आवाजें गूँज रही थीं। मैंने पहली बार इतने लोगों को सच्चे विश्वास के साथ बाबा जी का नाम लेते देखा। कुछ लोग अपनी मनोकामना पूरी होने पर प्रसाद बाँट रहे थे, कुछ लोग रोते हुए बाबा जी के सामने माथा टेक रहे थे। उस माहौल ने मेरे दिल को छू लिया। जब मेरी दर्शन की बारी आई तो मैंने बाबा जी के सामने हाथ जोड़कर सिर्फ इतना कहा – “बाबा जी, अब सब आपके हाथ में है। मैं थक चुका हूँ। बस मेरे परिवार को संभाल लो।” यह कहते-कहते मेरी आँखों से आँसू निकल आए। उस दिन मैंने पहली बार महसूस किया कि इंसान जब पूरी तरह टूट जाता है तब ही सच्चे दिल से भगवान को पुकारता है। दर्शन के बाद हमने मंदिर के बाहर बैठकर प्रसाद खाया। तभी एक बुजुर्ग व्यक्ति मेरे पास आए और बोले, “बेटा, चिंता मत कर। बाबा जी खाली हाथ नहीं लौटाते।” मुझे नहीं पता वह कौन थे, लेकिन उनकी बात सुनकर मेरे मन को बहुत सुकून मिला। उस दिन के बाद मेरे जीवन में धीरे-धीरे बदलाव शुरू होने लगे। सबसे पहले मेरे पिता की तबीयत में सुधार आने लगा। जो दवा महीनों से असर नहीं कर रही थी, वही अचानक फायदा करने लगी। डॉक्टर भी हैरान थे कि इतनी जल्दी recovery कैसे हो रही है। उधर ऑफिस में भी एक बड़ा बदलाव हुआ। जिस project पर मैं काम कर रहा था, वह अचानक कंपनी के लिए बहुत महत्वपूर्ण बन गया। मैंने पूरी मेहनत से काम किया और पहली बार मेरे मैनेजर ने मेरी तारीफ की। कुछ ही महीनों बाद मुझे promotion भी मिल गया। लेकिन असली चमत्कार अभी बाकी था। मेरे छोटे बेटे को अचानक एक रात तेज बुखार हो गया। हम उसे तुरंत अस्पताल लेकर गए। डॉक्टरों ने कहा कि infection काफी गंभीर है और अगले 24 घंटे बहुत महत्वपूर्ण हैं। यह सुनते ही हमारे पैरों तले जमीन खिसक गई। मैं पूरी रात अस्पताल के बाहर बैठकर सिर्फ बाबा मोहन राम जी का नाम जपता रहा। मैंने मन ही मन कहा, “बाबा जी, अगर मेरे बेटे को कुछ हो गया तो मैं टूट जाऊँगा।” उस रात करीब तीन बजे मुझे थोड़ी देर के लिए नींद आ गई। सपने में मैंने देखा कि एक सफेद कपड़े पहने बुजुर्ग मेरे बेटे के सिर पर हाथ रख रहे हैं और कह रहे हैं, “डर मत, बच्चा ठीक हो जाएगा।” मैं अचानक घबराकर उठा। उस समय मेरे शरीर में अजीब सी शांति थी। सुबह डॉक्टर ने बताया कि बच्चे की condition अब stable है और खतरा टल गया है। यह सुनते ही मेरी पत्नी रोने लगी। उस दिन मुझे पूरा विश्वास हो गया कि बाबा जी ने ही हमारे बच्चे को बचाया है। उस घटना के बाद हमारा पूरा परिवार बाबा जी का भक्त बन गया। अब हम हर महीने बाबा जी के दर्शन करने जाते हैं। मैंने अपने जीवन में यह सीखा कि जब इंसान पूरी श्रद्धा और सच्चे मन से भगवान को याद करता है, तो रास्ते अपने आप बनने लगते हैं। कुछ समय बाद मेरे जीवन में एक और बड़ी परीक्षा आई। जिस कंपनी में मैं काम करता था, वहाँ अचानक layoffs शुरू हो गए। रोज किसी ना किसी कर्मचारी को नौकरी से निकाला जा रहा था। पूरा ऑफिस डर के माहौल में था। मुझे भी लग रहा था कि शायद इस बार मेरी बारी होगी। लेकिन इस बार मेरे अंदर पहले जैसी घबराहट नहीं थी। मैंने बाबा जी पर भरोसा रखा। एक रात मैंने घर के मंदिर में दीपक जलाया और बाबा जी से प्रार्थना की। अगले ही दिन मुझे HR की तरफ से meeting के लिए बुलाया गया। मेरा दिल तेज धड़क रहा था। लेकिन वहाँ जाकर पता चला कि कंपनी मुझे निकालने के बजाय दूसरे department में higher responsibility देना चाहती है। साथ ही salary hike भी मिला। मैं समझ गया कि यह सब बाबा जी की कृपा है। धीरे-धीरे मेरे अंदर बहुत बदलाव आने लगे। पहले मैं छोटी-छोटी बातों पर गुस्सा हो जाता था, लेकिन अब मन शांत रहने लगा। पहले हर समय पैसों की चिंता रहती थी, लेकिन अब विश्वास था कि बाबा जी सब संभाल लेंगे। एक बार मेरी माँ ने कहा, “बेटा, मुश्किलें सबके जीवन में आती हैं, लेकिन जो इंसान विश्वास नहीं छोड़ता, वही जीतता है।” उनकी बात मेरे दिल में बैठ गई। मैंने महसूस किया कि बाबा जी सिर्फ हमारी मनोकामनाएँ पूरी नहीं करते, बल्कि हमें अंदर से मजबूत भी बनाते हैं। जब इंसान टूटने लगता है, तब वही शक्ति उसे संभालती है। पिछले साल मैं अपने परिवार के साथ फिर बाबा जी के मंदिर गया। इस बार मेरे मन में कोई डर या चिंता नहीं थी। सिर्फ धन्यवाद था। मंदिर में खड़े होकर मुझे वह दिन याद आ रहा था जब मैं पहली बार टूटा हुआ वहाँ आया था। और आज मैं उसी जगह खड़ा था, लेकिन एक नए विश्वास के साथ। वहाँ मैंने एक गरीब परिवार को देखा जो बहुत परेशान लग रहा था। उनके बच्चे की तबीयत खराब थी और उनके पास इलाज के पैसे नहीं थे। पता नहीं क्यों, लेकिन उस समय मेरे मन में आया कि मुझे उनकी मदद करनी चाहिए। मैंने जितना हो सका उनकी सहायता की। उस दिन मुझे समझ आया कि बाबा जी की सच्ची भक्ति सिर्फ मंदिर जाने में नहीं, बल्कि दूसरों की मदद करने में भी है। आज जब मैं पीछे मुड़कर देखता हूँ तो महसूस होता है कि अगर वह कठिन समय मेरे जीवन में नहीं आता, तो शायद मैं कभी बाबा जी के इतने करीब नहीं आ पाता। कभी-कभी भगवान हमें मुश्किलों से इसलिए गुजारते हैं ताकि हम अपने अंदर की शक्ति को पहचान सकें। मैं यह नहीं कहता कि मेरे जीवन में अब कोई समस्या नहीं आती। समस्याएँ आज भी आती हैं। लेकिन फर्क सिर्फ इतना है कि अब डर नहीं लगता। क्योंकि मुझे विश्वास है कि बाबा मोहन राम जी हमेशा मेरे साथ हैं। मेरी पत्नी भी अक्सर कहती है कि बाबा जी ने हमारे घर की खुशियाँ वापस लौटा दीं। पहले जहाँ हर समय तनाव और चिंता रहती थी, अब घर में शांति रहती है। बच्चे खुश हैं, माता-पिता स्वस्थ हैं और सबसे बड़ी बात – हमारे दिल में विश्वास है। कुछ महीने पहले मेरे एक दोस्त का business पूरी तरह बंद होने की कगार पर था। वह बहुत परेशान था और depression में चला गया था। मैंने उसे बाबा जी के बारे में बताया और उसके साथ मंदिर गया। शुरू में उसे ज्यादा विश्वास नहीं था, लेकिन उसने सच्चे मन से प्रार्थना की। कुछ ही समय बाद उसके business में धीरे-धीरे सुधार आने लगा। आज वह खुद हर शनिवार बाबा जी का नाम लेकर गरीबों को खाना खिलाता है। ऐसे कई अनुभव मैंने अपने आसपास देखे हैं। किसी की नौकरी लगी, किसी का बीमार बच्चा ठीक हुआ, किसी के घर की परेशानियाँ खत्म हुईं। हर इंसान की कहानी अलग है, लेकिन एक चीज समान है – सच्चा विश्वास। मैंने यह भी सीखा कि सिर्फ मनोकामना पूरी होने पर ही भगवान को याद करना सही नहीं है। असली भक्ति तब होती है जब इंसान अच्छे और बुरे दोनों समय में विश्वास बनाए रखे। अब हर सुबह मैं उठकर सबसे पहले बाबा जी का नाम लेता हूँ। चाहे कितना भी व्यस्त दिन हो, मैं कुछ मिनट प्रार्थना जरूर करता हूँ। इससे मन को एक अलग शांति मिलती है। कई बार लोग पूछते हैं कि क्या सच में चमत्कार होते हैं? मैं सिर्फ इतना कहता हूँ कि जब इंसान पूरी श्रद्धा से भगवान को पुकारता है, तब जो बदलाव उसके जीवन में आते हैं वही सबसे बड़ा चमत्कार होते हैं। आज मैं यह अनुभव इसलिए लिख रहा हूँ ताकि जो लोग अपने जीवन में परेशानियों से गुजर रहे हैं, उन्हें उम्मीद मिल सके। अगर आपका समय खराब चल रहा है, अगर आपको लगता है कि सब खत्म हो गया है, तो एक बार सच्चे मन से बाबा मोहन राम जी को याद करके देखिए। शायद रास्ता तुरंत न दिखे, लेकिन विश्वास रखिए – अंधेरे के बाद रोशनी जरूर आती है। मेरे लिए बाबा जी सिर्फ एक नाम नहीं हैं, बल्कि वह शक्ति हैं जिसने मुझे टूटने से बचाया। जब भी मैं कमजोर पड़ता हूँ, मुझे वही सपना याद आता है जिसमें सफेद कपड़े पहने वह बुजुर्ग मेरे बेटे के सिर पर हाथ रख रहे थे। उस पल को याद करके आज भी मेरे रोंगटे खड़े हो जाते हैं। मैं दिल से यही प्रार्थना करता हूँ कि बाबा मोहन राम जी की कृपा हर उस इंसान पर बनी रहे जो सच्चे मन से उन्हें याद करता है। जय बाबा मोहन राम की।