बचपन से ही मेरी इच्छा थी कि मैं डॉक्टर बनूँ। लेकिन परिवार की आर्थिक स्थिति बहुत साधारण थी। किताबें, कोचिंग और अन्य खर्च पूरे कर पाना आसान नहीं था। पढ़ाई में मेहनत तो मैं पूरी लगन से करती थी, लेकिन बार-बार सामने आने वाली आर्थिक कठिनाइयों के कारण कई बार हिम्मत टूट जाती। मेरे कई दोस्त अच्छे स्कूलों और कोचिंग सेंटरों में पढ़ रहे थे। उनके पास हर संसाधन था, जबकि मेरे पास सिर्फ किताबें और अपने दम पर पढ़ाई करने का जुनून। जब भी परीक्षाएँ पास आतीं, मेरे अंदर डर घर कर जाता—“क्या मैं सच में इस मुकाम तक पहुँच पाऊँगी?” इन्हीं दिनों मेरी बुआजी ने सलाह दी—“बेटा, बाबा मोहन राम का नाम लेकर पढ़ाई करो। बाबा की कृपा से मन शांत रहेगा और राह आसान होगी।” मैंने उनकी बात दिल से मान ली और रोज़ सुबह-शाम बाबा का नाम जपना शुरू किया। “जय बाबा मोहन राम 🔱🙏”—यह मंत्र मेरी दिनचर्या का हिस्सा बन गया। जब भी पढ़ाई करते समय मन डगमगाता, या कठिन सवाल हल नहीं होते, तो मैं आँखें बंद करके बाबा को याद करती। धीरे-धीरे आत्मविश्वास आने लगा और पढ़ाई का डर कम हो गया। परीक्षा के दिन भी मैंने बाबा का नाम लेकर ही पेन उठाया। प्रश्न पत्र हाथ में आते ही मैंने बाबा से प्रार्थना की—“मेरी मेहनत रंग लाओ।” आश्चर्य की बात यह रही कि वे ही प्रश्न आए, जिन पर मैंने सबसे ज्यादा ध्यान दिया था। उत्तर सहजता से लिखे गए। परिणाम घोषित हुआ तो मेरी खुशी का ठिकाना न रहा। न केवल मैंने अच्छे अंकों से परीक्षा उत्तीर्ण की, बल्कि मेरे जिले की मेरिट लिस्ट में भी मेरा नाम आया। घर में उत्सव जैसा माहौल हो गया। आज मैं मेडिकल कॉलेज में पढ़ रही हूँ। जब भी थकान होती है, या लगता है कि पढ़ाई भारी पड़ रही है, तो बाबा का नाम याद करती हूँ और मन फिर से तरोताज़ा हो जाता है। मेरे अनुभव से यही सीख है—मेहनत करो, लेकिन भरोसा बाबा पर रखो। वे मन की बाधाओं को दूर करते हैं और असंभव को संभव बना देते हैं।
जय बाबा मोहन राम
नीले घोड़े वाले बाबा का धाम, काली खोली