मैं पढ़ाई में अच्छी थी, लेकिन जब भी परीक्षा नज़दीक आती, मेरा ध्यान भटक जाता और घबराहट होने लगती। किताब खोलते ही मन विचलित हो जाता। मेरी माँ ने कहा—“बेटी, बाबा मोहन राम को याद करो। वे तुम्हें एकाग्रता देंगे।” मैंने उनकी बात मानी और रोज़ सुबह-शाम बाबा का नाम लेने लगी। पढ़ाई शुरू करने से पहले दीपक जलाती और बाबा से प्रार्थना करती। धीरे-धीरे मन की घबराहट खत्म होने लगी। किताबों पर ध्यान टिकने लगा और याद किया हुआ लंबे समय तक दिमाग़ में रहता। परीक्षा के समय मैं बिलकुल शांत रही और अच्छे अंकों से पास हुई। अब मुझे लगता है कि बाबा ने ही मेरी बुद्धि को स्थिर और मन को शांत किया।
जय बाबा मोहन राम
नीले घोड़े वाले बाबा का धाम, काली खोली